Monday, July 13, 2009

दिल उधास है बहुत कोई पैगाम ही लिख दो
तुम अपना नाम न लिखो,गम-नाम ही लिख दो

मेरी किस्मत में ग़म-इ-तन्हाई है लेकिन
तमाम उम्र न लिखो मगर एक शाम ही लिख दो

ज़ुरूरी नहीं की मिल जाए सुकून हर किस को
सरे-इ-बज्म न आओ मगर बेनाम ही लिख दो

ये जानता हूँ की उम्र भर तनहा मुझको रहना है
मगर पल दो पल,घडी दो घडी ,मेरे नाम ही लिख दो

चलो हम मान लेते है के सज़ा के मुसतहिक़ ठहरे हम
कोई इनाम न लिखो कोई इल्जाम ही लिख दो

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